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फिर जीत जाउंगा


थोडा डूबंगा,मगर मैं फिरतैर जाउंगा, ऐ जिंदगी तू देख में फिर जीत जाऊंगा। उनके तानों और गालियों के तीरों को मैं सीना तान सह जाउंगा, लोग क्या सोचेंगे,ये काम मैं उन पर ही छोड़ आउंगा। ऐ जिंदगी तू देख मैं फिर जीत जाउंगा। लाख निकाले बाहर मुझे या छोड आए दरिया पार या फिर पीड़ा दे हजार, मैं बहते लहू से ही इनसे आंख से आंख मिलाउंगा, ऐ जिंदगी तू देख मैं फिर जीत जाउंगा। छीन ले चाहें ये मुझसे मेरा जहान,या मिट्टी में मिला दे मेरा सम्मान, मैं अंगद के पैर जैसा अडिग हो जाउंगा, ऐ जिंदगी तू देख मैं फिर जीत जाउंगा। तोड़े चाहे ये मेरा विश्वास,या लगाये मेरी जिंदगी में आग, मैं आग से अंगारा बन इनको ही भस्म कर जाउंगा। ऐ जिंदगी तू देख मैं फिर जीत जाउंगा। किस मिट्टी से बने हो तुम,ये सोच मैं इनके जहन में बिठाउंगा, जब करेंगे सलाम मेरे जज्बे को,तब सीना तान अपनी मुछों पर हांथ फिराउंगा। ऐ जिंदगी तू देख मैं फिर जीत जाउंगा।


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